गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है प्रदूषण का गहरा असर

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Pollution can cause danger to fetus

दोस्तों दूषित हवा का असर गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इससे भ्रूण का विकास बाधित होता है।

आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन यह सच है कि भारत में होने वाली मौतों की एक बहुत बड़ी वजह प्रदूषित हवा है। इससे विभिन्न प्रकार की सांस से जुड़ी समस्याएं हो जाती है। सांस की तकलीफ के चलते पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें भारत में ही होती हैं। प्रदूषित हवा का असर मानसिक स्वास्थ्य तो पड़ता ही है, साथ ही कंसीव करने से लेकर मिसकरेज तक की दिक्कत आ जाती है। Pollution can cause danger to fetus

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प्रीमच्योर बेबी के होने की आशंका :
हवा में मौजूद खतरनाक रसायनिक तत्व जैसे कार्बन मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के चलते गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है और कई बार तो प्रीमच्योर बेबी के होने की आशंका बढ़ जाती है।

प्रदूषित हवा के चलते नवजात बच्चे के वजन पर असर पड़ता है। डॉक्टर्स के मुताबिक, गर्भपात के विभिन्न कारणों में वायु प्रदूषण भी एक है। वाहनों के धुएं से होने वाला प्रदूषण महिलाओं में गर्भपात या गर्भ में पल रहे शिशु की आने वाली जिंदगी में कई बीमारियों का कारण बन सकता है। इस सम्बन्ध में हुए दर्जनों अध्ययनों में यह बात सामने आई है।

25 फीसदी तक गर्भपात :
चैंकाने वाला आंकड़ा यह भी है कि आज की जीवनशैली और वातावरण के कारण कुल चिह्नित गर्भवती महिलाओं में से करीब 25 फीसदी को मिसकरेज (गर्भपात) हो रहा है। जबकि यह आंकड़ा 15 साल पहले तक 10 प्रतिशत के आस-पास था। इसके बढ़ने के मुख्य कारणों में बदलती जीवनशैली और अनचाहे गर्भ के साथ-साथ प्रदूषण भी शामिल है।

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कंसीव करने में दिक्कत :
प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से स्पर्म काउंट तो कम होते हैं, वहीं महिलाओं को पलूशन में ना रहने से कंसीव करने में अधिक दिक्कतें आती हैं। प्रदूषण में अधिक रहने वाली महिलाओं का गर्भपात होने का खतरा भी अधिक रहता है। इतना ही नहीं, समय से पहले डिलिवरी भी इसका बड़ा कारण है।

अगर कोई महिला लगातार प्रदूषित वातावरण में रहती है तो उसमें चिड़चिड़ापन, मानसिक असंतुलन, हीमोग्लोबिन की कमी जैसे विकार बढ़ जाते हैं। चूंकि गर्भावस्था में इन सभी चीजों का संतुलन आवश्यक होता है, ऐसे में उनमें गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है। अस्पताल में रोजाना इसके कई मामले सामने आते हैं। प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने से भी गर्भवती के स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं, जिससे उसके शिशु पर भी असर पड़ता है।

डॉक्टर शोभा गुप्ता
आईवीएफ एक्सपर्ट

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