महिला कंडोम क्या है, जानें उपयोग व फायदे – Female Condom

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महिला कंडोम क्या है? – What is Female condom?

महिला कंडोम को महिलाओं के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इस कंडोम को आप पुरुषों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कंडोम के विकल्प के तौर पर देख सकते हैं। आम कंडोम की तरह ही महिला कंडोम के इस्तेमाल से भी एसटीडी (यौन संचारित रोग) और प्रेग्नेंसी से बचाव किया जाता है। आम कंडोम को पुरुष अपने लिंग पर पहनते हैं, जबकि महिला कंडोम को महिलाओं की योनि के अंदर लगाया जाता है।

महिला कंडोम को योनि या गुदा में एसटीडी से बचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में भी धीरे-धीरे इसके लोकप्रियता बढ़ने लगी है। इसके चलते आपको इस लेख में महिला कंडोम के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

आगे आपको महिला कंडोम क्या है, महिला कंडोम कैसे काम करता है, महिला कंडोम से एसटीडी से बचाव होता है क्या, महिला कंडोम के फायदे, महिला कंडोम के इस्तेमाल और इसके नुकसान के बारे में भी बताया जा रहा है।

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महिला कंडोम, सामान्य कंडोम की तरह ही होता है, जो आपको यौन सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि ये अभी तक बहुत लोकप्रिय नहीं हैं, लेकिन महिला कंडोम धीरे-धीरे भारतीय महिलाओं के बीच स्वीकृति प्राप्त कर रहे हैं।

महिला कंडोम नियमित कंडोम का ही एक विकल्प है, जो गर्भावस्था और एसटीडी से लगभग समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें सामान्य कंडोम और महिला कंडोम में भिन्नता यह है कि इस कंडोम को लिंग पर पहनने के बजाय प्रेग्नेंसी की रोकथाम और एसटीडी से सुरक्षा के लिए योनि में लगाया जाता है। महिला कंडोम को आंतरिक कंडोम भी कहा जाता है।

महिला कंडोम इस्तेमाल करने के लिए थोड़े अभ्यास की जरूरत पड़ती है। सेक्स के दौरान महिला कंडोम के सही इस्तेमाल से ही आप इसका पूरा फायदा ले सकती हैं।

इस उत्पाद की सीमित मांग के कारण, भारतीय महिलाओं के लिए महिला कंडोम खरीदना आसान नहीं है। केवल कुछ मुट्ठीभर निर्माता इस उत्पाद को बनाते हैं और इसका वितरण भी पुरुष कंडोम की तरह मुख्य धारा में नहीं है। आंकड़े इस तथ्य का प्रमाण हैं, महिला कंडोम की तुलना में पुरुष कंडोम की वार्षिक उत्पादन मात्रा 500 गुना ज्यादा है।

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निम्नलिखित कुछ ब्रांड है जो भारत में महिला कंडोम का निर्माण और बिक्री करते है:-

    • वेलवेट
    • कॉन्फीडोम
    • क्यूपिड
    • वा डब्लू. ओ. डब्लू. (VA W.O.W)
    • ओरमैले (ORMELLE)

महिला कंडोम कैसे काम करता है?

महिला के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इस कंडोम को आंतरिक कंडोम के नाम से भी जाना जाता है। नरम प्लास्टिक से बने इस महिला कंडोम को योनि के अंदर लगाया जाता है।

महिला कंडोम योनि के भीतरी भाग को ढककर पुरुष के शुक्राणुओं को महिला के अंदर बनने वाले अंडों तक पहुंचने से रोकता है। शुक्राणुओं का अंडों तक न पहुंच पाने से आप प्रेग्नेंट नहीं होती हैं। इसके साथ ही महिला कंडोम कई तरह के यौन संचारित रोगों से भी आपका बचाव करता है।

महिला कंडोम एसटीडी से बचाव करता है क्या?

आपको बता दें कि महिला कंडोम न सिर्फ अनचाहे गर्भ को रोकने का तरीका है, ब्लकि इसके इस्तेमाल से आपको यौन संचारित रोग यानि एसटीडी होने की संभावनाएं भी काफी हद तक कम हो जाती हैं।

महिला कंडोम योनि, योनि के बाहरी भाग और गुदा को ढककर एसटीडी से आपका बचाव करते हैं। यह यौन संबंध के दौरान त्वचा, शुक्राणुओं और अन्य कारण से होने वाले एसटीडी रोग को फैलने का संभावनाएं कम कर देता है।

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महिला कंडोम के फायदे:

महिला कंडोम के कई फायदे होते हैं। प्रेग्नेंसी को रोकने और एसटीडी से सुरक्षा प्रदान करना महिला कंडोम का सबसे बड़ा फायदा माना जाता है। महिला कंडोम नाइट्रील नामक एक नरम प्लास्टिक पदार्थ से बने होते हैं, जिसकी वजह से यह पूरी तरह से हाइपोएलर्जेनिक (hypoallergenic: एलर्जी न करने वाले) माने जाते हैं।

महिला कंडोम से जननांगों की संवेदनशील त्वचा पर किसी भी तरह की कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है। इसके अन्य फायदों को नीचे विस्तार से बताया गया है।

  • महिला कंडोम सुरक्षित और आरामदायक होता है।
  • महिला द्वारा नियंत्रित होता है।
  • पीरियड्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • आप इसको स्पर्मीसाइड (Spermicide : गर्भनिरोधक पदार्थ जो स्पर्म को नष्ट करता है) के साथ भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • महिला कंडोम को आप सेक्स से 8 घंटे पहले या फोरप्ले के दौरान भी योनि में लगा सकती हैं।
  • लेटक्स रबड़ से त्वचा को एलर्जी होने पर भी आप महिला कंडोम का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • पानी व सिलिकोन युक्त ल्युबरिकेंट्स के साथ आप इसका उपयोग कर सकती हैं।
  • इसके इस्तेमाल से महिलाओं के हार्मोन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • इसको सही जगह पर लगाने के लिए पुरुषों के लिंग में उत्तेजना की आवश्यकता नहीं होती है।
  • महिला कंडोम, पुरुष कंडोम के मुकाबले अधिक भाग को ढकता या कवर करता है। इससे लेबिया (labia: योनि का अंदरूनी भाग), पेरीनियम (Perineum: योनि और गुदा के बीच का हिस्सा) और लिंग के निचले हिस्से से जुड़े रोगों से भी बचाव होता है।
  • महिला कंडोम से एचपीवी (HPV) संक्रमण और हर्पिस (Herpes) होने का खतरा कम हो जाता है।
  • महिला कंडोम का बाहरी हिस्सा महिला के योनिमुख को उत्तेजित कर सकता है। इससे होने अतिरिक्त उत्तेजना आप दोनों के चरम आनंद (ऑर्गेज्म) को बड़ा सकती है।

 

महिला कंडोम का इस्तेमाल –

महिला कंडोम का आकार पुरुष कंडोम से बड़ा होता है, लेकिन इसके आकार से आपको चिंता नहीं करनी चाहिए। जब आप इसका सही ढंग से इस्तेमाल करती हैं तो यह असुविधाजनक नहीं होता है। यदि आपको टैम्पोन का उपयोग करना आता है तो आप महिला कंडोम को भी आसानी से इस्तेमाल कर सकती हैं।

एक बार अभ्यास कर लेने पर महिला कंडोम का उपयोग करना बेहद आसान होता है। आगे आपको महिला कंडोम को उपयोग करने और निकालने के तरीके के बारे में जानकारी दी जा रही है।

महिला कंडोम योनि में कैसे लगाया जाए?

  1. सबसे पहले पैकेट पर इसकी एक्सपायरी तारीख (expiry date) की जांच कर लें और उसके बाद इसे ध्यान से खोलें।
  2. महिला कंडोम पहले से ही चिकनाई (ल्यूब्रिकेंट) के साथ आता है, लेकिन यदि आप चाहती हैं तो इसमें अधिक चिकनाई लगा सकती हैं।
  3. इसको लगाने से पहले आप आरामदायक स्थिति में आ जाएं, जैसे कुर्सी पर अपना एक पैर रखकर खड़े होना, लेट जाना या बैठना आदि।
  4. कंडोम के बंद सिरे को सिकोड़ते हुए अपनी योनि के भीतर टैम्पोन की तरह डालें।
  5. योनि के भीतर आपके गर्भाशय ग्रीवा तक, जहां तक संभव हो कंडोम को अपनी उंगली की सहायता से डालें। यह सुनिश्चित करें कि यह कहीं से मुड़ा नहीं होना चाहिए।
  6. इसके बाद अपनी उंगली को बाहर निकालें और कंडोम के बाहरी हिस्से को करीब एक इंच बाहर लटका दें। अब आप यौन क्रिया शुरू करने के लिए तैयार है।
  7. अपने साथी के लिंग को कंडोम के मुंह में डालने में मदद करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कंडोम और आपकी योनि के अंदर न निकल जाए।
  8. यदि आपको एनल सेक्स करना पसंद है और इसके लिए आप महिला कंडोम का उपयोग करना चाहती हैं, तो ऐसे में आप कंडोम के बंद हिस्से को हटा दें और अपनी उंगली की मदद से अपने गुदा में कंडोम डालें। इसके बाद कंडोम के अन्य छोर को बाहर लटका हुआ छोड़ दें।

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महिला कंडोम योनि से कैसे बाहर निकाले:

  1. सेक्स के बाद, कंडोम के बाहरी हिस्से (जो हिस्सा लटका हुआ है) को मोड़कर पकड़ लें, ताकि वीर्य कंडोम के अंदर ही रहे।
  2. अब धीरे से कंडोम को अपनी योनि या गुदा से बाहर खींचे, ध्यान रखें कि वीर्य फैले या गिरे नहीं।
  3. इसे कचरे के बॉक्स में फेंक दें। कभी भी कंडोम को फ्लश नहीं करें, क्योंकि यह आपके टॉयलेट (Toilet : शौचालय) को बंद कर सकता है।
  4. एक बार इस्तेमाल किए गए महिला कंडोम को दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सेक्स करते हर बार नये कंडोम का ही प्रयोग करें।

सेक्स के दौरान महिला कंडोम का थोड़ा बहुत घूमना पूरी तरह से सामान्य है, लेकिन लिंग पूरी तरह से कंडोम से ढका या कवर होना चाहिए। अगर लिंग आपकी योनि में कंडोम से बाहर निकल जाए है या कंडोम का बाहरी हिस्सा योनि के अंदर चला जाएं तो ऐसे में आप साथी को तुरंत रोकें। यदि आपके साथी ने कंडोम के अंदर वीर्यस्राव नहीं किया हो, तो कंडोम को सावधानी से हटाकर दोबारा सही से लगाएं।

(और पढ़ें – पहली बार सेक्स, तो याद रखें ये 11 जरूरी बातें……!)

सेक्स के दौरान अगर आपके साथी ने कंडोम के बाहर, योनीमुख के पास या आपकी योनि के अंदर वीर्यस्राव कर दिया हो, तो भी आप आपातकालीन गर्भनिरोधक से प्रेग्नेंसी को रोक सकती हैं। कुछ आपातकालीन गर्भनिरोधक असुरक्षित यौन संबंध के पांच दिनों तक गर्भावस्था को रोक सकती हैं।

महिला कंडोम के बारे में अच्छी बात यह है कि आप इसे फोरप्ले या सेक्स क्रिया शुरू करने से कुछ समय पहले योनि में लगा सकती हैं। इसको लगाते समय आपकी यौन क्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है। आपका साथी भी कंडोम लगाने में सहयोग कर सकता है।

महिला कंडोम के इस्तेमाल से आपको कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। इससे होने वाले नुकसान के बारे में निम्नतः विस्तार से समझाया गया है।

  • ­योनि, योनि के बाहरी भाग, गुदा और लिंग में जलन हो सकती है।
  • एलर्जी होने का खतरा।
  • योनि में परेशानी महसूस होना।

(और पढ़ें – बांझपन क्या है कैसे करें इसका उपचार? Infertility)

महिला कंडोम से होने वाली अन्य समस्याएं

    • महिला कंडोम सेक्स के दौरान योनि या गुदा के अंदर जा सकता है।
    • महिला कंडोम यौन संवेदना को कम कर सकता है।
    • गर्भनिरोधक के अन्य विकल्पों की जगह इसका इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है।
    • पुरुषों के कंडोम से ज्यादा महंगा होता है।

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स्त्री व पुरुष दोनो के गुप्त रोगों का इलाज किया जाता है :

पुरुष के रोग: नामर्दी, सुप्न्दोश, धात, वीर्य का पतलापन, लिंग का सही विकास ना होना, नसों का ढीलापन, लिंग से खून या पीप आना, शुक्राणु की कमी, शुगर से आई हुई कमजोरी, बचपन की गलतियो से आई कमजोरी, सेक्स टाइम में कमी आदि।

स्त्री के रोग: लुकोरिया, पीरियड का सही समय पर ना आना, गर्भवती ना होना, बच्चे का अधूरे गिरना, सेक्स की इच्छा ना होना आदि।

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