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Spirulina ke fayade | स्पिरुलिना के फायदे - Superfood Sirulina

स्पिरुलिना के फायदे – Spirulina ke fayade – 1000 Kg सब्जियाँ – फल या 1 Kg Spirulina | Spirulina benefits in hindi :

यह ( Spirulina ) एक मात्र शैवाल है जो पानी की सतह में होती है यह अद्वतीय नील-हरे शैवालों की एक प्रजाति है। किसी अन्य शैवाल की तुलना में High Quality वाले गाढ़े खाने के साथ मिश्रित होने के कारण इसे एक उच्च भोजन के रूप में जाना जाता है और इसे न्यूट्रिशन में ले सकते है।Spirulina ke fayade | स्पिरुलिना के फायदे - Superfood Sirulina

एमिनो एसिडो के साथ 60% से 71% शुद्ध प्रोटीन होता है जोकि सोयाबीन से 2 गुना और माँस से 4 गुना अधिक प्रोटीन है। पिछले 20 से ज्यादा वर्षो से करोड़ो लोग स्पिरुलिना कैप्सूल, पाउडर आदि रूप में सुरक्षित भोजन मानकर सेवन कर रहे है और नासा की रिपोर्ट अनुसार, स्पिरुलिना Super Food है आइये अब स्पिरुलिना के पोषक तत्वों के बारे में जानते है-

स्पिरुलिना के पोषक तत्व | Spirulina Nutrition Facts In Hindi :

स्पिरुलिना ( spirulina )अनेक पोषक तत्वों का सम्राट होने के कारण इसे खाद्य पदार्थों में शामिल किया गया है इसकी पोषण क्षमताये:

  1. Spirulina में सोयाबीन के मुकाबले 2 गुना अधिक प्रोटीन होता है।
  2. अण्डे (Egg) से 6 गुना अधिक प्रोटीन।
  3. सभी दालों से 3 गुना अधिक प्रोटीन (Protein) स्पिरुलिना में है।
  4. गाय के दूध से 14 गुना अधिक पोषण क्षमता।
  5. स्पीरुलीना में 13 प्रकार के मिनरल्स (minerals) और 13 प्रकार के विटामिन्स (bitamins) है जो इंसान को Daily Life में चाहिए होते है।
  6. स्पिरुलिना विटामिन B-12 का सर्वोत्तम स्रोत माना गया है।
  7. आयरन का सर्वोत्तम स्रोत होने के कारण पालक से 8 गुना अधिक आयरन स्पिरुलिना में है।
  8. विटामिन A, गाजर की तुलना में 25 अधिक है।
  9. विटामिन A के पोषक स्रोत: 56 गिलास दूध या 550 सेव के बराबर स्पिरुलिना के 12 कैप्सूल।
  10. विटामिन B-1 के पोषक श्रोत: 20 हरी मिर्च या 16 मछलियाँ के बराबर स्पिरुलिना के 12 कैप्सूल
  11. विटामिन B-2 के पोषक स्रोत : 420 अंगूर या 47 स्ट्रॉबेरी के बराबर स्पिरुलिना के 12 कैप्सूल
  12. विटामिन B-3 के पोषक स्रोत : 8 नीबू के बराबर 12 स्पिरुलिना कैप्सूल
  13. विटामिन B-6 के पोषक स्रोत : 90 ग्राम ब्रेड के बराबर 12 Spirulina Capsules
  14. विटामिन B-12 के पोषक स्रोत : 240 ग्राम पनीर या स्पिरुलिना के 12 कैप्सूल
  15. विटामिन E : चिकन के 6 बोटियाँ या 14 गिलास दूध की तुलना में स्पिरुलिना के 12 कैप्सूल प्रभावी है।

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स्पिरुलिना के फायदे - Spirulina ke fayade - 1000 Kg सब्जियाँ - फल या 1 Kg Spirulina
स्पिरुलिना के फायदे – Spirulina ke fayade – 1000 Kg सब्जियाँ – फल या 1 Kg Spirulina

स्पिरुलिना के फायदे | Spirulina Ke Fayde In Hindi :

प्रतिदिन एक स्वस्थ व्यक्ति को अनेक प्रकार के पोषक तत्वों को लेने की जरुरत होती है और इसके लिए भिन्न भिन्न प्रकार के आहार लेना होता है परन्तु प्रकति ने हमें कुछ अच्छे विकल्प दिए है जिनसे हम ज्यादतर आहारों

Spirulina capsules | स्पिरुलिना कैप्सूल

की प्राप्ति कर सकते है और लाभ ले सकते है।
स्पिरुलिना भी एक ऐसा ही विकल्प है जो अनेक पोषक तत्वों कको पूरा करने में कारगर है।

स्पिरुलिना के फायदे वजन कम करने में | Weight loss in Hindi :

इसमें ख़राब वसा और कैलोरी कम होती है जिसके कारण इसका इस्तेमाल करने से शरीर को कमजोरी आये बिना वजन कम किया जा सकता है।

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उच्च रक्तचाप को कम करना | SPirulina for high Blood Pressure :

अनेक रिचर्स में पाया गया कि स्पिरुलिना के नियमित उपयोग से उच्च रक्तचाप को कम करने में लाभदायक दो सकता है जिससे मधुमेह, स्ट्रोक और हृदय रोग सम्बन्धी बीमारियों से बचा जा सकता है।

प्रतिरोधकता क्षमता बढ़ाने में स्पिरुलिना के फायदे | Spirulina for Immunity Power :

प्रतिरोधकता तंत्र कोशिकाओं, प्रोटीन, ऊतको एवं अन्य अंगो का एक जटिल एवं पेचीदा नेटवर्क है जो शरीर की संक्रामक रोगाणुओं जैसे जीवाणु, विषाण और दूसरे हानिकारक तत्वों से रक्षा करता है।

स्पिरुलिना में मौजूद पोषक तत्व प्रतिरोधकता क्षमता को बढ़ा देते है।

मस्तिष्क के लिए | Spirulina for brain | Spirulina Ke Fayde :

इसमें Tryptophan एमिनो एसिड होता है जो कि मस्तिष्क के लिए फायदेमंद है इससे मेमोरी तेज होती है डिप्रेशन, तनाव जैसे समस्याएं नहीं होती है।

स्पिरुलिना के फायदे | एनीमिया से बचाये | Spirulina for anemia :

रक्त की कमी मतलब एनीमिया इसे अनेक नामों से जाना जाता है बुजुर्गो में यह आम बात है जिससे खून की कमी के कारण कमजोरी और थकान महसूस होती है। एक रिचर्स हुई जिसमे 40 वृद्ध व्यक्तियों को शामिल किया गया और उन्हें स्पिरुलिना के कैप्सूल नियमित रूप से कुछ दिन तक खिलाये गए परिणाम यह हुआ कि उनके हीमोग्लोबिन में वृद्धि में हुई और उनके प्रतिरक्षा में सुधार आया है।

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स्पिरुलिना के फायदे कैंसर से रोकें | Spirulina For cancer :

कई रिचर्स में यह पुष्टि हुई है कि Spirulina के नियम से रहकर आहार लेने से शरीर में विभिन्न प्रकार के कैंसर (cancer) के विकास को रोका जा सकता है या कैंसर से बचा जा सकता है क्योंकि यह मूल रूप से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।इनके आलावा स्पिरुलिना के फायदे अनेक है जिसके कारण यह दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है, यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है, अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से ज़रूर परामर्श करें, डी.एन.एस.आयुर्वेदा इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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फंगल इन्फेक्शन | 4 गुना बढ़े मरीज, 5 में से 4 दवाइयां हुईं बेअसर

बढ़ रहे फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) के मरीज़, कई दवाएँ हुई बेअसर:

इन दिनों घर-घर में लोग फंगल इन्फेक्शन (त्वचा की बीमारी) से परेशान हैं। पांच साल में मरीजों की संख्या चार गुना हो गई है। जितनी तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी, उसकी दोगुना तेजी से दवाइयों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टर मरीज को कोई भी एंटीफंगल या एंटीबायोटिक दवा लिखकर दे रहे हैं तो उससे परेशानी ठीक नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है फंगल इन्फेक्शन में पांच दवाइयां कारगर थी। इनमें से चार दवाइयां बेअसर हो रही हैं। पांचवीं दवा जो अभी लिख रहे हैं उसका भी धीरे-धीरे असर कम होने लगा है। फंगल इन्फेक्शन | 4 गुना बढ़े मरीज, 5 में से 4 दवाइयां हुईं बेअसर

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सामान्य तौर पर बरसात के मौसम के बाद फंगल इन्फेक्शन के मरीज बढ़ते थे, लेकिन आजकल पूरे साल ऐसे मरीजों की भीड़ लगी हुई है। दवाइयों के बेअसर होने के पीछे की वजह डॉक्टर मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली पचास तरह की स्टेरॉइड क्रीम को मान रहे हैं, जो खुलेआम बिकती हैं। मरीज इसे लगाकर चमड़ी को पूरी तरह खराब करने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचता है।

इससे डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा व ट्यूब बेअसर हो रही है। खुजली या लाल चकत्ते होने पर लोग तुरंत मेडिकल स्टोर से खुजली की ट्यूब लाकर लगा लेते हैं। इससे थोड़े दिन खुजली बंद रहती है, लेकिन कुछ दिनों बाद बीमारी दोगुना गति से फैलने लगती है। खुजली से चमड़ी गलने लगती है। इसके बाद डॉक्टरों की लिखी दवाइयां भी असर नहीं कर रही हैं। इस मामले में डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। वहां से संकेत मिले हैं कि दुकानों पर मिलने वाली स्टेरॉइड क्रीम पर रोक लगाई जाएगी। फंगल इन्फेक्शन | 4 गुना बढ़े मरीज, 5 में से 4 दवाइयां हुईं बेअसर

इन दवाइयों का असर हुआ खत्म:

  1. ग्रीसोफ्यूलविन
  2. टर्बिनाफाइन
  3. केटोकोनाजोल
  4. फ्लूकेनाजोल

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एकमात्र गोली की कीमत 300 से 500 रुपए:

डॉक्टरों के मुताबिक सिर्फ इंट्राकेनोजोल दवाई मरीजों को लिखी जा रही है। यह भी धीरे-धीरे काम करना बंद कर रही है। बाजार में एक वोरिकोनाजोल दवाई मिल रही है, लेकिन यह एक टेबलेट 300 से 500 रुपए में उपलब्ध है। गरीब या मध्यमवर्गीय मरीज के लिए यह दवाई दो से तीन महीने तक लगातार खाना संभव नहीं है। इससे डॉक्टर असमंजस में हैं कि मरीज को कौन सी दवाई लिखें।

प्रतिबंधित करना होगी स्टेरॉइड की बिक्री:

एमवाय अस्पताल में चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एचके नारंग ने बताया कि पांच साल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग को चर्म रोग के डॉक्टर और मरीजों की परेशानी को समझने की आवश्यकता है। जिस तरह से मेडिकल दुकान से नाइट्रावेट सहित नशे की कई गोलियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है, वैसे ही स्टेरॉइड ट्यूब पर भी रोक लगना चाहिए। अभी हम सिर्फ मरीजों को ही जागरूक कर सकते हैं, इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है।

पूरा परिवार इन्फेक्शन (Fungal infection) का शिकार:

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल दशोरे का कहना है फंगल इन्फेक्शन के लिए अब कोई एक मौसम जिम्मेदार नहीं रह गया है। स्टेरॉइड क्रीम लगाकर मरीज गंभीर संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। एक व्यक्ति के कारण पूरा परिवार इसकी चपेट में आ रहा है। हमारे पास एक-एक गांव से सैक़ड़ों मरीज आ रहे हैं। प्रशासन को समय रहते स्टेरॉइड की बिक्री रोकना चाहिए, वरना भविष्य बहुत भयावह होगा। इन्फेक्शन के कारण लोगों की जिंदगी खराब हो रही है।

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ये क्रीम बढ़ा रही हैं बीमारी:

  1. -बेटनावेट
  2. -टेनोवेट एम
  3. -टिग्बोडर्म
  4. -पेंडर्म
  5. -डर्मिफाइव
  6. -सीसोर
  7. -रिंग ओ जोन
  8. -जालिम लोशन
  9. -रिंग गार्ड सहित 50 तरह की क्रीम चमड़ी खराब कर रही हैं।

(चर्म रोग विशेषज्ञों के अनुसार)

लड़कियों के चेहरे पर उग रहे बाल:

डॉक्टरों के मुताबिक लड़कियां चर्म रोगों से बहुत परेशान हैं। चेहरे पर कोई इन्फेक्शन होने पर बाजार से क्रीम लगाने से अब चेहरे पर बाल उगने लगे हैं। ऐसी समस्या लेकर कई लड़कियां डॉक्टरों के पास पहुंच रही हैं। हर कोई लेजर ट्रीटमेंट का लाखों रुपए खर्च नहीं उठा सकता। ऐसे में लड़कियां परेशानी होती हैं, जिनमें से कई अवसाद में आकर मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हो जाती हैं। (Fungal infection) फंगल इन्फेक्शन | 4 गुना बढ़े मरीज, 5 में से 4 दवाइयां हुईं बेअसर

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homemade medicine for prevention of many disease

भले ही आपको यकीन न हो, लेकिन सिर्फ एक दवा का प्रयोग कर आप दर्जनों प्रकार के वात रोगों से बच सकते हैं। जी हां, इस दवा का सेवन करने से आप कठिन से कठिन बीमारियों से पूरी तरह से निजात पा सकते हैं। अगर आपको भी होते हैं वात रोग, तो पहले जानिए इस चमत्कारिक दवा और इसकी प्रयोग विधि के बारे में।  Home made herbal medicine for prevention of many disease

विधिः
200 ग्राम लहसुन छीलकर पीस लें। अब लगभग 4 लीटर दूध में लहसुन व 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर गाढ़ा होने तक उबालें। फिर इसमें 400 ग्राम मिश्री, 400 ग्राम गाय का घी तथा सौंठ, काली मिर्च, पीपर, दालचीनी, इलायची, तमालपात्र, नागकेशर, पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी, दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना, देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा, नीम, सुआ व कौंचा के बीज का चूर्ण प्रत्येक 3-3 ग्राम मिलाकर धीमी आंच पर हिलाते रहें। जब मिश्रण घी छोड़ने लगे लगे और गाढ़ा मावा बन जाए, तब ठंडा करके इसे कांच की बरनी में भरकर रखें।

प्रयोग :
प्रतिदिन इस दवा को 10 से 20 ग्राम की मात्रा में, सुबह गाय के दूध के साथ लें (पाचनशक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः ले सकते हैं।)परंतु ध्यान रखें, इसका सेवन कर रहे हैं तो भोजन में मूली, अधिक तेल व घी तथा खट्टे पदार्थों का सेवन न करें और स्नान व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

इस औषधि के कुछ विशेष लाभ:
इससे पक्षाघात (लकवा), अर्दित (मुंह का लकवा), दर्द, गर्दन व कमर का दर्द,अस्थिच्युत (डिसलोकेशन), अस्थिभग्न (फ्रेक्चर) एवं अन्य अस्थिरोग, गृध्रसी (सायटिका), जोड़ों का दर्द, स्पांडिलोसिस आदि तथा दमा, पुरानी खांसी,हाथ पैरों में सुन्नता अथवा जकड़न, कंपन्न आदि के साथ 80 वात रोगों में लाभ होता है और शारीरिक विकास होता है।

“दवा के प्रयोग से पूर्व, अपनी प्रकृति के अनुसार किसी उत्तम वैद्य की सलाह अवश्य लें”

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नई दिल्ली:
अब दवा कंपनियों को एंटीबायॉटिक्स और मानसिक रोगों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं के हर साइड इफेक्ट की जानकारी अपने पर्च में देनी होगी। भारत के ड्रग कंट्रोलरजनरल (डीसीजीआई) ने राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को पत्र लिखकर इस बाबत जरूरी इंतजाम करने को कहा है।

लीफ्लेट में बताना होगा दवा के साइड इफेक्ट के बारे में-

इस पत्र में कहा गया है कि अगर किसी दवा के नए साइड इफेक्ट्स का पता चलता है तो दवा के साथ दिए गए लीफ्लेट में उसके बारे में भी बताना होगा। केंद्र की ओर से यह कदम दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बारे में इंडियन फार्माकोपिया कमिशन द्वारा की गई स्टडी के बाद उठाया गया है। 

डॉक्टर या कोई शख्श भी दे सकता है साइड इफेक्ट की जानकारी-

कमिशन ने सरकार को कई दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी दी है। कंपनियों ने अपने लीफ्लेट में इनकी जिक्र नहीं किया था। कमिशन ने हाल में ही दवाओं के साइड इफेक्ट्स की जानकारी देने के लिए एक ऐप भी जारी किया है। इस पर डॉक्टरों के साथ ही कोई भी शख्स दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी दे सकता है। 

कमिशन ने डीसीजीआई को एंटीबॉयटिक दवा- सीफोटैक्सिम, सैफिग्जाइम, ओफ्लॉक्सासिन और मनोरोगों की दवा क्वीटिआपाइन आदि के नए साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी दी थी।

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