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Dhat Rog Medicine | धात रोग की दवा

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Dhat Rog / Discharge FallingHormone changes in the body a young boy starts to masturbate and has dreams of sex.

Package contains 3 Types of medicines: Herbal Powder | Herbal Tablets no.1 | Herbal Tablets no.2
This treatment is for 90 days.

धातु रोग – वीर्य का अनैच्छिक रूप से निकलना, जो आम तौर पर नींद के दौरान या अन्य परिस्थितियां जैसे पेशाब या मल त्याग के दौरान होता है।

पैकेज में 3 प्रकार की दवाइयाँ हैं: हर्बल पाउडर | हर्बल गोलियाँ  न.1 | हर्बल गोलियाँ न.1
यह उपचार 90 दिनों  के लिए है|

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Description

क्या होता है धात रोग / What is dhat Rog / Discharge Falling?

धातु रोग का मतलब होता है, वीर्य का अनैच्छिक रूप से निकलना, जो आम तौर पर नींद के दौरान या अन्य परिस्थितियां जैसे पेशाब या मल त्याग के दौरान होता है। यह एक पुरुषों की यौन समस्या है, जिसमें अनैच्छिक रूप से वीर्यपात (वीर्य रिसना या बहना) होने लगता है, जो आमतौर पर यौन उत्तेजना और संभोग के बिना होता है।

यह समस्या अक्सर रोगी के चिड़चिड़ेपन व उसके यौन अंगों में दुर्बलता से जुड़ी हुई होती है। कुछ प्रकार के मामलों में कब्ज के दौरान मल त्याग करने के लिए लगाए गए के कारण भी मूत्र के साथ वीर्य जैसा निकलने लगता है। कुछ मामलों में वीर्य मूत्र से पहले निकल जाता है, या मूत्र से मिलकर भी निकलने लग जाता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन से सम्बंधित कुछ और लक्षण –

  • शारीरिक कमजोरी होना
  • सिर, कमर, पैरों में दर्द रहना
  • मन की कमजोरी
  • आलस्य
  • डरपोक स्वाभाव होना
  • पेशाब में जलन
  • पेशाब ज्यादा आना
  • अति शीघ्र स्खलन धात गिरने के लक्षण में आम है
  • छोटे से काम करने पर थकान आना

इसका इलाज ?

धातु रोग (dhati rog in hindi) जैसी बीमारी को रोकने के लिए आयुर्वेदिक उपचार किया जाता है।

इसलिए डी.एन.एस. आयुर्वेदा क्लिनिक में सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा. नदीम अहमद ने वर्षों की मेहनत के बाद एक ऐसी औषधि तय्यार की है जो की इसे कुछ ही महीनों में पूर्णतया ठीक कर देता है, यह औषधि किसी भी प्रकार के केमिकल से फ्री है, यह पूर्णतया हर्बल है।

हमारे उत्पाद खासियत:

  • हमारे औषधि में हमने उचित मात्रा में जड़ी बूटियों का उपयोग किया है।
  • उच्च केंद्रित शुद्ध और मानकीकृत हर्बल मेडिसिन।
  • यह उत्पाद योग्य और अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक द्वारा तैयार किया गया।
  • किसी भी प्रकार का सिंथेटिक रंग, रसायन, और कृत्रिम स्वादिष्ट बनाने का केमिकल के प्रयोग रहित।
  • औषधि के प्रभाव का परीक्षण पहले ही किया जा चुका है और क्लिनिकल ट्रायल के दौरान सिद्ध हो चुका है।
  • 2013 से इस औषधि हज़ारों रोगियों पर सफल उपयोग।
  • आई.एस.ओ. प्रमाणित (ISO Certified) क्लिनिक।

Additional information

Weight 400 g
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1 M, 2 M, 3 M

क्यों होता है ये ?

धात रोग होने के कारण निम्‍न हैं:

  1. पुरूष जननांग टेस्टेस (वृषण) को बाकी शरीर के तापमान से कुछ हद तक ठंडा रखना चाहिए। जब टेस्टेस अधिक गर्मी के प्रभाव में आते हैं, (जैसे गर्म पानी के टब में नहाने के बाद) ऐसे में रात को सोने के बाद शुक्राणु निकालने लगते हैं, क्योकिं शुक्राणु की सप्लाई क्षतिग्रस्त हो जाती है।।
  2. यौन उत्तेजनाओं को प्रभावित करने वाला दृश्य या ख्याल आने पर भी इस समस्या का पैदा होना लाज़मी है।
  3. खारब आहार भी इस समस्या का एक कारण है। कम प्रोटीन युक्त आहार, या बिना अंडे वाले आहार का सेवन करना भी लाभदायक साबित हो सकता है।
  4. अत्याधिक हस्तमैथुन या सेक्स करना भी धातु रोग का कारण बन सकता है।
  5. धात का रोग कमजोर पाचन तंत्र या शारीरिक कमजोरी के कारण भी हो जाता है।
  6. इसके अलावा, अधिकांश पूर्वी शहर, वेस्टर्न शौचालय (पश्चिमी प्रकार के शौचालयों) से रहित हैं। उनके शौचालय जमीन पर लगाए जाते हैं क्योंकि पुरुषों को उन पर उकड़ू बैठने (squat) की आवश्यकता पड़ती है। इस अवस्था में जब मल त्याग करने के लिए अत्याधिक जोर लगाया जाता है, तो वीर्य अपने आप निकलने लगता है। अगर वीर्य निकलने की समस्या रोजाना होने लगे तो यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है।
  7. आदमी को अपने दैनिक मल क्रिया से पूरी तरह से पेट साफ कर सकता है।
  8. तंत्रिका तंत्र की कमजोरी।
  9. मूत्र और जननांग अंगों की क्षीणता।
  10. अत्याधिक हस्थमैथुन करने की आदत।
  11. यौन असंतोष।
  12. त्वचा आदि की समस्या के कारण वृषण कोष संबंधी समस्याएं।
  13. संकीर्ण (तंग) मूत्र निकास मार्ग।
  14. मलाशय के विकार जैसे बवासीर, एनल फिशर, कीड़े और त्वचा में फोड़े फुंसी आदि।
  15. मूत्राशय भरना।
  16. टेस्टोस्टेरोन पर आधारित दवाएं।
  17. गद्दे या कंबल के साथ संपर्क (रगड़) के कारण उत्तेजना।

परहेज़

जरूरी परहेज क्या है देखें:

सबसे पहले आप अपने मन में अश्लील विचार न आने दें अपना मन साफ़ रखें और आप हस्तमैथुन बिलकुल न करें क्यूंकि ये बुरी आदत कई गुप्त रोग की समस्या की जड़ है कुछ खाने पीने में परहेज है जो बहुत जरूरी है आप गर्म तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल न करें जिसकी प्रकृति गर्म जैसे मांस, मछली, अंड्डा, तली भुनी चीजें, ज्यादा मसालेदार, मैदा से बनी चीजें, खट्टी चीजें, चाय, कॉफ़ी कोल्ड्रिंक्स, मसूर दाल, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, चाव्मिन।

किसी भी तरह का नशा नहीं करना है जैसे बीडी, सिगरेट, तम्बाकू, गुटका, शराब, ये सब आप परहेज करें क्यूंकि पूरे परहेज के साथ दवा का इस्तेमाल करेंगे तो वो पूरा असर करेगी।

आपको क्या – क्या खाना है?

जब आप दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको क्या खाना है देखें: जैसे अंकुरित मूंग या चना, ओटस, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, रोटी, चावल, दाल, सब्जी, फल, सूखे मेवे को पानी में भिगोकर इस्तेमाल करें।

दवा कैसे खाएँ

दवा खाने की विधि:

आयुर्वेदिक चूर्ण :    1चम्मच छोटे चम्मच से सुबह – शाम
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 1) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 2) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में

नोट:
सभी दवाएँ नाश्ता व खाना खाने के 15 से 30 मिनट बाद ही लें,
दवाएँ लेने के बाद कम से कम 15 मिनट किसी भी प्रकार का श्रम ना करें,
सभी दवाएँ सादा पानी से लें (पानी ना बहुत गर्म हो ना ही बहुत ठंडा)

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