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Leucorrhoea Medicine | ल्यूकोरिया की दवा | One Month

SKU: LC-1

1,600.00

LeucorrhoeaLeucorrhea is the medical name for normal vaginal discharge. You may notice it in your underwear. It’s usually thick and sticky. It can be white or yellow, but it doesn’t cause itching, pain, burning or irritation of the tissue around the vaginal opening.

Package contains 3 Types of medicines: Herbal Powder | Herbal Tablets no.1 | Herbal Tablets no.2
This treatment is for 90 days.

ल्यूकोरिया – ल्यूकोरिया की समस्या में सफेद, पीला, हलका नीला या लाल रंग का चिपचिपा और बदबूदार वजाइनल स्राव होता है। यह स्राव अधिकतर दूधिया सफेद रंग का होता है। इसलिए इसे श्वेत प्रदर नाम दिया गया है।

पैकेज में 3 प्रकार की दवाइयाँ हैं: हर्बल पाउडर | हर्बल गोलियाँ  न.1 | हर्बल गोलियाँ न.1
यह उपचार 90 दिनों  के लिए है|

Available: In stock

Description

ल्यूकोरिया क्या है | What is Leucorrhoea?

ल्यूकोरिया को सामान्य भाषा में सफेद पानी या श्वेत प्रदर भी कहा जाता है। यह स्त्रियों में होने वाली एक आम बीमारी है। इसमें योनि से सफेद रंग का गाढ़ा और दुर्गन्धयुक्त पानी निकलता है। किसी तरह का इन्फेक्शन होने पर स्राव पीले, हल्के नीले या हल्के लाल रंग का, और बहुत चिपचिपा एवं बदबूदार होता है। Leucorrhoea Medicine | ल्यूकोरिया की दवा

यह किसी योनि या गर्भाशय से संबंधित रोग का लक्षण भी हो सकता है। ल्यूकोरिया का उपचार ना करने पर महिला का स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है। अलग-अलग महिलाओं में स्राव की मात्रा एवं समयावधि अलग-अलग होती है। इसके कारण प्रजनन अंगों में सूजन आ जाती है।

ल्यूकोरिया के प्रकार (Leucorrhoea Types):

  1. स्वभाविक ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर): मासिक चक्र के दौरान योनि से पानी जैसा बहने वाला दुर्गन्धरहित चिपचिपा, पतला और सामान्य माना जाता है। महिलाओं में अण्डोत्सर्ग के दौरान यह स्राव बढ़ जाता है। यह स्त्री के शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। इसमें किसी उपचार की जरूरत नहीं होती है। केवल उचित आहार-विहार का पालन करना चाहिए।
  2. अस्वभाविक ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर): ऐसा बैक्टेरियल इन्फेक्शन होने पर देखा जाता है। स्राव का रंग असामान्य गाढ़ापन लिए हुए एवं दुर्गन्धयुक्त होता है। यह यीस्ट इन्फेक्षन भी हो सकता है।

ल्यूकोरिया से सम्बंधित कुछ और लक्षण –

  • योनिमार्ग में तीव्र खुजली एवं चुनचुनाहट होना।
  • कमर में दर्द बना रहना।
  • कमजोरी महसूस होना एवं चक्कर आना।
  • बार-बार पेशाब आना और पेट में भारीपन बना रहना।
  • भूख ना लगना एवं जी मिचलाना।
  • आखों के नीचे काले घेरों का पड़ना।
  • थोड़ा-सा मेहनत करने पर भी आंखों के सामने अंधेरा छा जाना एवं कभी-कभी चक्कर आना।
  • पिंडलियों में खिंचाव एवं शरीर भारी रहना।
  • चिड़चिड़ापन रहना। Read More…..

इसका इलाज ?

ल्यूकोरिया जैसी पीड़ादायक समस्या से नपटने के लिए आयुर्वेदिक औषधि का सेवन परहेज़ के साथ कुछ महीनो के लिए करना चाहिए। Leucorrhoea Medicine | ल्यूकोरिया की दवा

इसलिए डी.एन.एस. आयुर्वेदा क्लिनिक में सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा. नदीम अहमद ने वर्षों की मेहनत के बाद एक ऐसी औषधि तय्यार की है जो की इसे कुछ ही महीनों में पूर्णतया ठीक कर देता है, यह औषधि किसी भी प्रकार के केमिकल से फ्री है, यह पूर्णतया हर्बल है|

हमारे उत्पाद खासियत:

  • हमारे औषधि में हमने उचित मात्रा में जड़ी बूटियों का उपयोग किया है।
  • उच्च केंद्रित शुद्ध और मानकीकृत हर्बल मेडिसिन।
  • यह उत्पाद योग्य और अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक द्वारा तैयार किया गया।
  • किसी भी प्रकार का सिंथेटिक रंग, रसायन, और कृत्रिम स्वादिष्ट बनाने का केमिकल के प्रयोग रहित।
  • औषधि के प्रभाव का परीक्षण पहले ही किया जा चुका है और क्लिनिकल ट्रायल के दौरान सिद्ध हो चुका है।
  • 2013 से इस औषधि हज़ारों रोगियों पर सफल उपयोग।
  • आई.एस.ओ. प्रमाणित (ISO Certified) क्लिनिक।

 

Additional information

Weight 400 g
Dimensions 18 × 18 × 5 cm
Choose Course | कोर्स चुनें

1 M, 2 M, 3 M

क्यों होता है ये ?

ल्यूकोरिया के कारण निम्‍न हैं:

मासिक धर्म में पहले या बाद में थोड़ी मात्रा में सफेद पानी बहना सामान्य बात है, लेकिन अधिक मात्रा में, नियमित रूप से पीला या नीलापन लिए स्राव आने लगे तो ये कारण हो सकते हैंः-

    • अविवाहित महिलाओं में यह पोषण की कमी, योनि की अस्वच्छता, खून की कमी और तला हुए तेज मसालेदार भोजन करने से होता है।
    • योनि में ‘ट्रिकोमोन्स वेगिनेल्स’ नामक बैक्टीरिया के कारण ल्यूकोरिया होता है।
    • बार-बार गर्भपात होना या कराना।
    • डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं की योनि में फंगल यीस्ट नामक संक्रामक रोग के कारण ल्यूकोरिया होता है।
    • असामान्य यौन सम्बन्धों से होने वाले संक्रमण के कारण।
    • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होने के कारण।
    • तनाव एवं अत्यधिक मेहनत करने के कारण।
    • कॉपर-टी लगा हुआ होने पर।

परहेज़

जरूरी परहेज क्या है देखें:

  1. हरी या लाल मिर्च
  2. फास्ट फूड से बचें
  3. बाहर का खाना
  4. ज़्यादा मसालेदार भोजन
  5. बादी भोजन

आपको क्या – क्या खाना है?

जब आप दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको क्या खाना है देखें:

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां
  2. भरपूर पानी पीएं
  3. साबुत अनाज
  4. छाछ पीएं
  5. मूली का सेवन

दवा कैसे खाएँ

दवा खाने की विधि:

आयुर्वेदिक चूर्ण :    1चम्मच छोटे चम्मच से सुबह – शाम
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 1) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 2) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में

 

नोट:
सभी दवाएँ नाश्ता व खाना खाने के 15 से 30 मिनट बाद ही लें,
दवाएँ लेने के बाद कम से कम 15 मिनट किसी भी प्रकार का श्रम ना करें,
सभी दवाएँ सादा पानी से लें (पानी ना बहुत गर्म हो ना ही बहुत ठंडा)

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