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Piles / Hemorrhoid Medicine | बवासीर की दवा

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PilesPiles are collections of tissue and vein that become inflamed and swollen. The size of piles can vary, and they are found inside or outside the anus.

Package contains 4 Types of medicines: Herbal Powder | Herbal Tablets no.1 | Herbal Tablets no.2 | Ointment
This treatment is for 90 days.

बवासीर – गुदा के अंदर और बाहर तथा मलाशय के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं।

पैकेज में 4 प्रकार की दवाइयाँ हैं: हर्बल पाउडर | हर्बल गोलियाँ  न.1 | हर्बल गोलियाँ न.1 | मलहम
यह उपचार 90 दिनों  के लिए है|

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Description

बवासीर क्या है | What is Piles / Hemorrhoid?

बवासीर को Piles या Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी बीमारी है, जो बेहद तकलीफदेह होती है। इसमें गुदा के अंदर और बाहर तथा मलाशय के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं।

मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज कराना बेहद ज़रूरी होता है। समय पर बवासीर का उपचार नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है।

बवासीर के प्रकार (Piles / Hemorrhoids Types):

1.खूनी बवासीर:
खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते हैं। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के रूप में आने लगता है।

2.बादी बवासीर:
बादी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता। यह मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं। इनमें बार-बार खुजली एवं जलन होती है।

बवासीर से सम्बंधित कुछ और लक्षण –

  • गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
  • शौच के बाद भी पेट साफ ना हेने का आभास होना।
  • शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
  • शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
  • गुदा के आस-पास खुजली, एवं लालीपन, व सूजन रहना।
  • शौच के वक्त म्यूकस का आना।
  • बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना, लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।

इसका इलाज ?

बवासीर जैसी पीड़ादायक समस्या से नपटने के लिए आयुर्वेदिक औषधि का सेवन परहेज़ के साथ कुछ महीनो के लिए करना चाहिए।

इसलिए डी.एन.एस. आयुर्वेदा क्लिनिक में सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा. नदीम अहमद ने वर्षों की मेहनत के बाद एक ऐसी औषधि तय्यार की है जो की इसे कुछ ही महीनों में पूर्णतया ठीक कर देता है, यह औषधि किसी भी प्रकार के केमिकल से फ्री है, यह पूर्णतया हर्बल है|

हमारे उत्पाद खासियत:

  • हमारे औषधि में हमने उचित मात्रा में जड़ी बूटियों का उपयोग किया है।
  • उच्च केंद्रित शुद्ध और मानकीकृत हर्बल मेडिसिन।
  • यह उत्पाद योग्य और अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक द्वारा तैयार किया गया।
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  • 2013 से इस औषधि हज़ारों रोगियों पर सफल उपयोग।
  • आई.एस.ओ. प्रमाणित (ISO Certified) क्लिनिक।

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क्यों होता है ये ?

बवासीर होने के कारण निम्‍न हैं:

  1. कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है, जैसे- बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस इत्यादि। इसके साथ ही जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है। इन लोगों को बवासीर से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है।
  2. कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है, और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें मस्सा कहा जाता है।
  3. अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
  4. शौच ठीक से ना होना।
  5. फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना।
  6. महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
  7. आलस्य या शारीरिक गतिविधि कम करना।
  8. धूम्रपान और शराब का सेवन।
  9. अवसाद
  10. शोच करते समय दबाव डालना।

परहेज़

जरूरी परहेज क्या है देखें:

  1. हरी या लाल मिर्च
  2. धूम्रपान और गुटखा
  3. फास्ट फूड से बचें
  4. बाहर का खाना
  5. ज़्यादा मसालेदार भोजन
  6. बादी भोजन

आपको क्या – क्या खाना है?

जब आप दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको क्या खाना है देखें:

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां
  2. भरपूर पानी पीएं
  3. साबुत अनाज
  4. छाछ पीएं
  5. मूली का सेवन

दवा कैसे खाएँ

दवा खाने की विधि:

आयुर्वेदिक चूर्ण :    1चम्मच छोटे चम्मच से सुबह – शाम
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 1) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में
आयुर्वेदिक गोलियाँ  (न. 2) :- 1 गोली सुबह व 1 गोली रात में
आयुर्वेदिक मलहम           :-   सुबह शाम गुदामार्ग में लगाएँ

 

नोट:
सभी दवाएँ नाश्ता व खाना खाने के 15 से 30 मिनट बाद ही लें,
दवाएँ लेने के बाद कम से कम 15 मिनट किसी भी प्रकार का श्रम ना करें,
सभी दवाएँ सादा पानी से लें (पानी ना बहुत गर्म हो ना ही बहुत ठंडा)

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