बांझपन क्या है कैसे करें इसका उपचार? Infertility

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Infertility Treatment ayurveda
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बांझपन क्या है कैसे करें इसका उपचार?

What is Infertility, How to cure it?

इस रोग में स्त्री संतान उत्पन्न के अयोग्य होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। यदि स्त्री गर्भाशय या डिम्बकोष नाल में कोई नैसंर्गिक विकार(Natural disorder) हो, तो यह रोग प्रायः असाध्य होता है। रोग के मूल कारण जानकर उचित चिकित्सा करनी चाहिए।

कई बार स्त्री के अंदर शरीर में प्राकृतिक विकार होते हैं। सबसे पहला विकार तो प्रायः योनि की तंगी है। इस अवस्था में संभोग के दौरान स्त्री को बेहद कष्ट होता है तथा स्त्री इससे घृणा करती है, तो फिर गर्भ ठहरने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। इसकी चिकित्सा आपरेशन है।

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गर्भाशय के मुंह की तंगी दूसरा कारण है। इससे भी गर्भ ठहर पाना असंभव होता है।

बांझपन में आयुर्वेदिक चिकित्सा

सुपारी पाक:

जो स्त्री व पुरूष संतान से वचिंत हों और उनमें कोई विकार न हो तो 40 दिन इसको(सुपारी पाक) खाने से उनको संतान हो जाती है। 10 ग्राम प्रतिदिन सुबह खाली पेट और रात में पाव भर दूध से खायें।

माजून सुपारी पाक:

माजून सुपारी पाक(जौहर/प्राणाचार्य) 10 ग्राम सुबह-शाम दूध से खायें तथा फेनीक्योर(जौहर लैब) 1-1 कैप्सूल 3 बार पानी के साथ लें। यह उन बांझ स्त्रियों के लिए लाभप्रद है, जिनको विवाह होने के काफी समय बाद तक बच्चा नहीं हुआ, जो बच्चे के लिए तरसती हो। यह दवा गर्भाशय की तमाम विकारों और कमजोरियों को दूर करके गर्भधारण करने की क्षमता पैदा करती है।

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भांग के पत्ते 4 ग्राम, कस्तूरी(मुश्क) 4 मि.ग्रा., केसर 20 ग्राम, लौंग 8 नग, जायफल 2 नग, दक्खनी सुपारी 6 नग, अफीम 2 ग्राम, गुड़ 6 ग्राम। सबको अलग-अलग पीसकर व छानकर और गुड़ मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 टिकिया सुबह बछड़े वाली गाय के दूध के साथ खिलाते रहें।

यदि 40 वर्षीय स्त्री को भी बांझपन हो तो कस्तूरी 2 मि.ग्रा., अफीम 3 ग्रा., जायफल, केसर, भंग के बीच प्रत्येक 1 ग्राम, नोफल तेलिया 3 ग्राम, लौंग 4 ग्राम। सबको पीसकर गुड़ मिलाकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। मासिक धर्म से निवृत होने के बाद तीन दिन में तीन गोलियां लें। बांझपन दूर हो जायेगा।

बच का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन में लपेट कर मासिक धर्म आ चुकने के बाद तीन दिन तक खिलायें। इसी प्रकार प्रत्येक मास यह औषधि मासिक धर्म के बाद तीन माह तक लेते रहें, स्त्री गर्भवती हो जायेगी।

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करंज की छाल और लहसुन दोनों, समान मात्रा में लेकर दोनों को पीसकर 6 ग्राम दही में लपेट कर खिलायें। बांझपन में फायदेमंद है।

अशोकारिष्ट और दशमूलारिष्ट दोनों 2-2 चम्मच बराबर पानी मिला कर दोनों समय भोजन के बाद लें। बांझपन में उपयोगी है।

फेमटोन(आयुलैब्स) 2-2 चम्मच लगातार कई माह तक पिलाते रहें। यह गर्भ ठहरने में मदद करती है।

अशोगाइन कैप्सूल 1-1 कैप्सूल 2-3 बार एवं अशोगाइन सीरप(आयुरलैब्स) 2-2 चम्मच जब तक गर्भ न ठहरे तब तक स्त्री को देते रहें।

चन्द्रपभा वटी 2-2 गोलियां 2 बार चबाकर दूध पीने के लिए दें।

फलघृत 1-1 चम्मच 2 बार दूध के साथ दें।

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स्त्री व पुरुष दोनो के गुप्त रोगों का इलाज किया जाता है :

पुरुष के रोग: नामर्दी, सुप्न्दोश, धात, वीर्य का पतलापन, लिंग का सही विकास ना होना, नसों का ढीलापन, लिंग से खून या पीप आना, शुक्राणु की कमी, शुगर से आई हुई कमजोरी, बचपन की गलतियो से आई कमजोरी, सेक्स टाइम में कमी आदि।

स्त्री के रोग: लुकोरिया, पीरियड का सही समय पर ना आना, गर्भवती ना होना, बच्चे का अधूरे गिरना, सेक्स की इच्छा ना होना आदि।

डी. एन. एस. आयुर्वेदा क्लिनिक, लखनऊ

9918584999, 9918536999

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